"पापा का रिजल्ट कब आएगा?" – एक छोटे बच्चे की मासूमियत और एक पिता का संघर्ष

Dheerajpowerofthink

4/19/2026

कहानी:

आज रविवार है, 19 अप्रैल 2026। सुबह के करीब 5:30 बज रहे थे। बाहर सूरज की पहली किरण भी ठीक से नहीं निकली थी कि तभी मेरा 5 साल का बेटा नींद में ही धीरे से उठा। उसने बड़ी मासूमियत से मेरा हाथ पकड़ा और अपनी छोटी सी आवाज में एक ऐसा सवाल पूछ लिया जिसने मुझे अंदर तक झकझोर दिया।

उसने कहा— "पापा, संडे को तो सबके पापा पूरा दिन घर में रहते हैं, तो आप ऑफिस क्यों जाते हो? मेरे साथ क्यों नहीं खेलते? आप कभी मेरे साथ नहीं खेलते, बस ऑफिस चले जाते हो।"

उसकी आँखों में वो शिकायत और मासूमियत देखकर मेरा मन भर आया। अपनी भावनाओं को काबू में करते हुए मैंने उसे समझाया— "बेटा, अभी पापा का पेपर चल रहा है। जैसे आपके स्कूल में पेपर चलते हैं ना, वैसे ही पापा का भी एग्जाम है।"

तभी उसने फौरन पूछा— "तो पापा, आपका रिजल्ट कब आएगा?"

मैंने उसे गले लगाया और कहा— "बस 10-12 दिन और, फिर पापा का रिजल्ट आ जाएगा और हम खूब खेलेंगे।"

सच कहूँ तो, अभी मैं अपने बिजनेस के एक ऐसे दौर से गुजर रहा हूँ जहाँ संघर्ष बहुत ज्यादा है। अप्रैल के कुछ नए प्रोजेक्ट्स का काम इतना है कि मेरे लिए सोमवार और रविवार में कोई फर्क नहीं बचा है। अपने सपनों को पूरा करने और अपने परिवार को एक बेहतर भविष्य देने की होड़ में मैं हर दिन ऑफिस जा रहा हूँ।

लेकिन आज उसकी उन मासूम बातों ने मुझे यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि सफलता की इस दौड़ में कहीं मैं अपने बेटे के बचपन के वो अनमोल पल तो नहीं खो रहा हूँ? एक पिता के रूप में मुझे बहुत दुख होता है कि मैं उसे वो समय नहीं दे पा रहा हूँ जिसका वह हकदार है।

पर मुझे यकीन है, यह 'पेपर' (संघर्ष) जल्द खत्म होगा। जब मेरा 'रिजल्ट' आएगा, तो वह सफलता न सिर्फ मेरे बिजनेस के लिए होगी, बल्कि वह मुझे मेरे बेटे के साथ बिताने के लिए ढेर सारा वक्त भी देगी। तब तक, बस यही उम्मीद है कि मेरा बेटा बड़ा होकर अपने पिता के इस संघर्ष को समझ पाएगा।